Jitesh sharma भारतीय क्रिकेट में हर खिलाड़ी की सफलता के पीछे केवल उसकी मेहनत ही नहीं, बल्कि उसके पहले कोच का योगदान भी बेहद अहम होता है। एक खिलाड़ी को सही दिशा, अनुशासन और तकनीक सिखाने का काम उसके शुरुआती कोच करते हैं। यही वजह है कि कई दिग्गज खिलाड़ी अपने पहले कोच को अपनी सफलता की असली नींव मानते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के धाकड़ बल्लेबाज़ और विकेटकीपर Jitesh sharma ने भी हाल ही में अपने पहले कोच का जिक्र किया और उन्हें सभी का ‘गुरु’ बताया। उनकी यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है बल्कि इस बात का सबूत भी है कि एक सही गुरु ही शिष्य को महानता की राह दिखा सकता है।
बचपन और क्रिकेट का जुनून
Jitesh sharma का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट का शौक था। गली क्रिकेट से शुरुआत करने वाले जितेश ने बहुत जल्दी समझ लिया था कि वह केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि प्रोफेशनल स्तर पर क्रिकेट खेलना चाहते हैं। लेकिन केवल जुनून ही काफी नहीं होता, उसे दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी चाहिए होता है। यहीं पर उनकी मुलाकात उनके पहले कोच से हुई।

पहले कोच की अहमियत
Jitesh sharma ने जिस कोच को अपना पहला गुरु माना, वे केवल उन्हें क्रिकेट खेलना ही नहीं सिखाते थे, बल्कि अनुशासन, धैर्य और मेहनत का महत्व भी समझाते थे। यही कारण है कि जितेश ने उन्हें “सबका गुरु” कहा। दरअसल, यह कोच केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि दर्जनों खिलाड़ियों को तराश चुके थे। क्रिकेट अकादमी में आने वाला हर बच्चा उनसे प्रेरणा लेता था।
उनकी खासियत यह थी कि वे हर बच्चे की ताकत और कमजोरी को बारीकी से पहचानते थे। जितेश की विकेटकीपिंग में तेजी और बल्लेबाज़ी में पावर हिटिंग का हुनर उसी शुरुआती प्रशिक्षण का नतीजा है।
संघर्ष के दिनों में साथ
हर खिलाड़ी के करियर में ऐसे दिन आते हैं जब उसे लगता है कि वह आगे नहीं बढ़ पाएगा। जितेश शर्मा के साथ भी ऐसा हुआ। घरेलू क्रिकेट में जगह बनाने और खुद को साबित करने के लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा। ऐसे समय में उनके पहले कोच ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें कभी हार न मानने की सीख दी। यही सीख आगे चलकर उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) और फिर टीम इंडिया तक ले गई।
IPL और टीम इंडिया तक का सफर
Jitesh sharma को IPL में खेलने का मौका पंजाब किंग्स की ओर से मिला। उन्होंने अपने विस्फोटक बल्लेबाज़ी और तेज विकेटकीपिंग से सभी का ध्यान खींचा। जब वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुने गए, तो उन्होंने फिर अपने कोच को याद किया और कहा कि उनकी आज की सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ उनके पहले गुरु का है।
गुरु ही असली प्रेरणा
भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊपर स्थान दिया गया है। जितेश शर्मा की यह कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर उनके पहले कोच ने उन्हें सही दिशा नहीं दी होती, तो शायद आज वे यहां तक नहीं पहुंच पाते।
निष्कर्ष
Jitesh sharma की कहानी हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है। यह साबित करती है कि केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही गुरु का मार्गदर्शन भी सफलता के लिए जरूरी है। उनके पहले कोच ने न केवल उन्हें क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं, बल्कि जीवन के मूल्य भी समझाए। यही वजह है कि जितेश आज उन्हें “सबका गुरु” कहकर सम्मानित करते हैं।
👉 अगर आप भी क्रिकेट या किसी अन्य क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं, तो अपने पहले गुरु के मार्गदर्शन और सीख को कभी न भूलें।