हाल के दिनों में बॉलीवुड फिल्म Dhurandhar सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों को लेकर नहीं, बल्कि अपने कंटेंट को लेकर भी चर्चा में है। मशहूर YouTuber और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर Dhruv Rathee ने फिल्म को लेकर एक बड़ा बयान दिया, जिसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी।
Dhruv Rathee ने Dhurandhar Controversy पर बात करते हुए इसे “Well-Made Propaganda” करार दिया और दावा किया कि यह फिल्म The Taj Story और Bengal Files जैसी फिल्मों से भी ज्यादा खतरनाक है।
लेकिन सवाल यह है—
👉 आखिर Dhruv Rathee ने ऐसा क्यों कहा?
👉 क्या सच में Dhurandhar एक साधारण फिल्म नहीं, बल्कि एक गहरी सोच के साथ बनाई गई कहानी है?
What Did Dhruv Rathee Say About Dhurandhar?
Dhruv Rathee का मानना है कि Dhurandhar Controversy इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह फिल्म बेहद स्मार्ट तरीके से अपना नैरेटिव पेश करती है।
उनके अनुसार, कुछ फिल्में इतनी खराब या एकतरफा होती हैं कि दर्शक खुद समझ जाते हैं कि यह “bakwas” या प्रोपेगेंडा है। लेकिन Dhurandhar उस कैटेगरी में नहीं आती।
Dhruv Rathee ने कहा कि:
- फिल्म तकनीकी रूप से मजबूत है
- इसकी कहानी engaging है
- इमोशनल कनेक्शन बहुत प्रभावशाली है
यही वजह है कि दर्शक बिना सवाल किए फिल्म के मैसेज को स्वीकार कर लेते हैं।
Why ‘Well-Made Propaganda’ Is More Dangerous
Dhruv Rathee के अनुसार, Dhurandhar Controversy की जड़ यही है कि यह फिल्म “खराब प्रोपेगेंडा” नहीं, बल्कि अच्छे तरीके से पैक किया गया प्रोपेगेंडा है।
जब कोई फिल्म:
- अच्छी सिनेमैटोग्राफी
- दमदार बैकग्राउंड म्यूज़िक
- और मजबूत किरदारों के साथ
एक खास विचार को आगे बढ़ाती है,
तो दर्शक भावनात्मक रूप से उससे जुड़ जाता है।
यही वजह है कि Dhruv Rathee इसे ज्यादा खतरनाक मानते हैं।
Comparison With The Taj Story And Bengal Files
Dhruv Rathee ने The Taj Story और Bengal Files का उदाहरण देते हुए कहा कि ये फिल्में बहुत हद तक एकतरफा और साफ तौर पर वैचारिक नजर आती हैं।
ऐसी फिल्मों को देखकर कई दर्शक पहले ही सतर्क हो जाते हैं।
लेकिन Dhurandhar Controversy में समस्या यह है कि:
- फिल्म खुद को न्यूट्रल दिखाती है
- लेकिन भीतर ही भीतर एक खास सोच को प्रमोट करती है
यही subtle approach इसे ज्यादा प्रभावशाली बनाती है।
Audience Reaction And Social Media Debate

Dhruv Rathee के बयान के बाद Dhurandhar Controversy सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी।
जहाँ एक तरफ उनके समर्थकों ने उनके विश्लेषण की तारीफ की, वहीं दूसरी तरफ कई लोगों ने उन्हें “biased” और “anti-cinema” तक कह दिया।
सोशल मीडिया पर दो साफ गुट बन गए:
- एक गुट मानता है कि Dhruv Rathee ने सही मुद्दा उठाया
- दूसरा गुट इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला मानता है
Is Dhurandhar Really Influencing Minds?
इस सवाल का जवाब आसान नहीं है।
हर फिल्म किसी न किसी नजरिए को पेश करती है। लेकिन Dhurandhar Controversy इसलिए अलग है क्योंकि यह दर्शकों को सोचने का मौका कम और महसूस करने का मौका ज्यादा देती है।
Dhruv Rathee का तर्क है कि:
- जब भावनाएं हावी हो जाती हैं
- तब लॉजिक पीछे छूट जाता है
और यही किसी भी प्रोपेगेंडा की सबसे बड़ी ताकत होती है।
Filmmakers’ Silence And Industry Response
अब तक फिल्म के मेकर्स या कलाकारों की तरफ से Dhruv Rathee के बयान पर कोई बड़ा आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
हालांकि, कुछ इंडस्ट्री इनसाइडर्स का कहना है कि:
- फिल्म को सिर्फ एक “entertainment product” के तौर पर देखा जाना चाहिए
- हर कहानी का अपना perspective होता है
लेकिन Dhurandhar Controversy ने यह सवाल ज़रूर खड़ा कर दिया है कि फिल्मों की सामाजिक जिम्मेदारी कहाँ तक होती है।
Freedom Of Expression Vs Responsibility
यह बहस नई नहीं है।
हर बार जब कोई फिल्म विवादों में आती है, तो दो बातें सामने आती हैं:
- Freedom of Expression
- Social Responsibility
Dhruv Rathee का मानना है कि जब कोई फिल्म करोड़ों लोगों तक पहुँचती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
यही कारण है कि Dhurandhar Controversy सिर्फ एक फिल्म विवाद नहीं, बल्कि समाज और सिनेमा के रिश्ते पर सवाल है।
Final Thoughts
आखिर में यह कहना गलत नहीं होगा कि Dhurandhar Controversy ने दर्शकों को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है।
क्या हमें सिर्फ मनोरंजन देखना चाहिए, या उसके पीछे छुपे संदेशों को भी समझना चाहिए?
Dhruv Rathee का बयान चाहे सही लगे या गलत, लेकिन उसने एक जरूरी चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
फैसला अब दर्शकों के हाथ में है—
देखना, समझना और फिर अपनी राय बनाना।